Friday, June 28, 2013

मौसम बीत गए ऐसे ही, बिन जामुन बिन आम

विस्तारों में खो गया , जीवन और संसार,
खोजा कुछ भी ना मिला, कहते जिसको सार,

कल की खातिर मार ना मन ये, कल ना आये काम,
मौसम बीत गए ऐसे ही, बिन जामुन बिन आम,

कल कल में ये उमर खो गई, खो गए सारे मीत,
सा-रे गा, ही ना रहे, क्या स्वर क्या संगीत?

सुबह से लेकर शाम बेचते, बन गई ऐसी बात,
उगता सूरज कब देखा था, रहा नहीं ये याद,

मिलने की बस लालच में, तरसे जाते नैन,
कैद हुए तस्वीरों में वो, नैन हुए बेचैन,

ऐसा होता , वैसा होता, दिन वो भी थे खास,
चारपाई में लेटे   होते , आँखों भरा आकाश,

थोडा थोडा करते करते, जग में जागे आस,
जग ना है ये जादूगर है, बढती जाये प्यास,




Wednesday, June 19, 2013

आज , कल-कब?


समय की कोमल सी रेशें,
बुनती सांसों के चितेरे,
स्वप्न के किरचे बिखेरे,
नींद के उन्मादी फेरे,

मन की अवनि पर लगे हैं,
अभिलाषा के कोपल सुनहरे,
जुगनू से आभास होते,
छोटे छोटे आस सोते ,

आस के विश्वास पर,
और, सखा वृन्द परिहास पर,
जीते चलो , दुःख को दलते ,


ब्यस्त जीवन,खुद का न, मन-तन ,
आप विक्रय कर चले,
स्वयं पर अभिसार को,

बूंद बारिश, हवा शीतल,
देख तरसे, मन ना बरसे,
जीत कहते, स्वयं हार को?

रुक ठहर जा, अब सुधर जा,
परिवर्तित हो, कुछ बदल जा,
करो हिम्मत , थोडा जी लो,
फेंको, छतरी, गीले हो, लो,

माप दंड, ब्यापार में होते,
जीवन तो उद्दंड है होता,
समय में मत बांधो दिन को,
दिनकर के क्या दास तुम हो,
कोई हँसता नेपथ्य में,अरे,
नाट्य का परिहास तुम हो?

स्वयं ही फेंको लकीरे,
मस्त होकर ब्योम में,
इन्द्रधनुषी देखो सपने,
कर, कहे जो मन ये तेरा,
जी ले अब कुछ,
दिन रात के छोड़ फेरे,
ये नहीं हैं तेरे मेरे,

बहुत कुछ है, परे इनके,
ख़ुशी छोटी, बड़ी यादें,
बातों से जो बनती बातें,
हैं छणिक सब, आज , कल-कब?
बस यही है, कणी सी है,
मोल इसका?, मणि सी है,
जी ले इसको, बीती जाती
कल नहीं कुछ, बस यही हैं,
कल नहीं कुछ, बस यही हैं,