मेरी कलम से...मेरी रचनाएँ...
कुछ इस कदर हुई, मेरी दुआ कबूल, असर होने की उम्र उनकी, मेरी उम्र से लंबी थी।
Wednesday, November 20, 2013
खुदखुशी
खुश नहीं था वह खुद कि जिंदगी से,
खुदखुशी कर ली उसने,
मगर खुछ याद है मुझे,
अख़बार में "अग्निदग्धा की मौत" लिखे जाने से पहले,
उसने कहा थे कापते होठो से..."बचा लो मुझे"।
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