आज बस मौन हूँ मैं,
वाचाल होकर ना जाना कभी,
प्रमुख हूँ या, गौण हूँ मैं,
कई बार, सीखा जीवन से,
औरोँ को कई सीख दिया,
समझ नहीं आता मगर,
एकलव्य हूँ या द्रोण हूँ मैं,
वाचाल होकर ना जाना कभी,
प्रमुख हूँ या, गौण हूँ मैं,
कई बार, सीखा जीवन से,
औरोँ को कई सीख दिया,
समझ नहीं आता मगर,
एकलव्य हूँ या द्रोण हूँ मैं,