Tuesday, June 3, 2008

कुछ भी तो नही बदलता,

कुछ भी तो नही बदलता,

सुबह से शाम तक,

ऑफिस को जाने से ऑफिस से आने तक,

चाय की प्याली से डिनर की थाली तक ,

कुछ भी तो नही बदलता, सुबह से शाम...

२.

वही अस्त - व्यस्त सा कमरा , बिखरा अख़बार

समेटे उलझी घटनाये , और मृत संवेदनाये ,

वही कमरे की चारदीवारी,

सुबह जैसी , अभी भी वैसी,

चुपचाप मौन, अपलक मुझे निहारती,

३।

वो रास्ता, जो रोज ख़त्म होकर भी,

रोज फिर शुरु हो जाता है,

और गली का का वो कुत्ता,

जो थोड़ा गुर्राता है , और फिर थककर सो जाता है,

कुछ भी तो नही बदलता, सुबह से शाम...

४।

कुछ भी तो नही बदलता,

आदमी भी वही, और उसकी परिभाषा भी,

हाँ ये सच है, की अभिलाषाएं थोडी घट -बढ़ जाती हैं,

कुछ रस्ते में ही बिखर जाती हैं,

और कुछ पुरी होकर, ख़त्म हो जाती हैं,

५.

जिंदगी का एक दिन , हाथ से फिसल जाता है,

सवरने की तलाश में, टूटकर बिखर जाता है,

कई आशाएं, जिंदा ही दफन हो जाती है,

कई सपने , दिवास्पन रह जाते हैं,

कुछ यादें मन का दरवाजा खटखटाकर ,

खली हाथ लौट जाती हैं,

और कई संवेदनाये , जिंदगी की व्यस्तता देख ,

अलविदा कह जाती है,

६।

कई ख्वाब बदल जाते हैं,

कई लम्हे गुजर बदल जाते हैं,

कई यादें सिमट जाती हैं,

कई यादें बिखर जाती हैं,

एक वक्त बदल जाता है,

उम्र बदल जाती है,

कुछ साथी बिछर जाते हैं,

कुछ रिश्ते उलझ जाते हैं,

सूरज भी बदल जाता है,

तारीख बदल जाती है,

---------------------------

क्या क्या ना बदलता है,

सुबह से शाम तक, (repeat above two lines two times)

नही बदलता तो बस मेरा ये ख्याल,

जो अब भी यही कहता है,

कुछ भी तो नही बदलता, सुबह से शाम तक

4 comments:

  1. Boss,

    kitna touchi likhthe hai aap.....lagta hi nahi..ki aap ne likha hai..kynoki aap ekdum mast rahte ho...aur ye sab ...padkar lagta hai..ki koi kavi kafi samay se akela hai....but..aapka blog padkar bahut sukun mila..aur kuch yaad bhi taja hui...waiting for more..

    Jai

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  2. ye cakrayaview hai, aur abhimanyu bhi.
    ye chal kapat ye prapanch hi sahi.
    virbhumi me virgati hi sahi,
    kartvya path per chale to sahi....

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  3. I must say its nice observation abt life.. Thats true nothing is changing .. we are also keep living same life without any change ... Truth of life... good one Uma...
    the way u wrote all the feeling in words are real art ..... gr8 Man...

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  4. sab kuchh badal jaata hai par jo vitness sakshi har anubhav ko mahasus karne vaala kabhi nahi badlata. sunder hai.

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