Friday, June 28, 2013

मौसम बीत गए ऐसे ही, बिन जामुन बिन आम

विस्तारों में खो गया , जीवन और संसार,
खोजा कुछ भी ना मिला, कहते जिसको सार,

कल की खातिर मार ना मन ये, कल ना आये काम,
मौसम बीत गए ऐसे ही, बिन जामुन बिन आम,

कल कल में ये उमर खो गई, खो गए सारे मीत,
सा-रे गा, ही ना रहे, क्या स्वर क्या संगीत?

सुबह से लेकर शाम बेचते, बन गई ऐसी बात,
उगता सूरज कब देखा था, रहा नहीं ये याद,

मिलने की बस लालच में, तरसे जाते नैन,
कैद हुए तस्वीरों में वो, नैन हुए बेचैन,

ऐसा होता , वैसा होता, दिन वो भी थे खास,
चारपाई में लेटे   होते , आँखों भरा आकाश,

थोडा थोडा करते करते, जग में जागे आस,
जग ना है ये जादूगर है, बढती जाये प्यास,




2 comments:

  1. मिलने की बस लालच में, तरसे जाते नैन,
    कैद हुए तस्वीरों में वो, नैन हुए बेचैन,


    ..... Ultimate!!!!!

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  2. too good, Kaviraj.. Keep it up..

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