Sunday, August 16, 2015

दिल नहीं रोता


नरमुंडों, की झुण्ड रोज सड़कों पर निकलती है,
मगर धड़कता दिल, धड़ के साथ नहीं होता,
देखते कई जुल्म ये रोज ,  चुपचाप गुजरते हैं,
औरों की पीड़ा देख कर कोई नहीं रोता ,
 
नहीं रोता ये दिल सुनकर, के कहीं दो चार मर गए
मेरे नगर, मेरे देश में ये कब नहीं होता
तिरंगे में लिपटे शहीद देख अब दिल नहीं रोता
रोते बिलखते नसीब, देख अब दिल नहीं रोता
 
नजर मिल नहीं पाती, उन लाचार आँखों से
ट्रैफिक में फंसी कार का शीशा नहीं उठता
खुले हाथों को देख फुटपाथ पर, ये दिल नहीं रोता
भूखे पेट के हालात पर, ये दिल नहीं रोता
 
लूटते लोग, लोगों को धरम के नाम पर कितने
कहीं तलवारें चल जाती हैं ,  लहू बदनाम है होता
धरम की तेज धारी देख कर, ये दिल नहीं रोता
जली बस्ती वो सारी देखकर , ये दिल नहीं रोता
 
मासूम के लूटने की ख़बरें कब नहीं आती
मगर क्यों लूटना ये देख, दिल आपा नहीं खोता
मैले आँचल देखकर , अब दिल नहीं रोता
फैले काजल को  देखकर, अब दिल नहीं रोता

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