अपनी ही जिंदगी से परेशान क्यों है
हर शख्स खुद से अनजान क्यों है
इंसानियत कहाँ गई इतनी दूर चलकर,
इस सवाल पर चुपचाप खड़ा इन्सान क्यों है?
वक़्त मुंह फेरे खड़ा है, हवा भी उलटी दिशा में,
धरती फट पड़ी और रो रहा आसमान क्यों हैं?
हर तरफ खून के कतरे और गोलियां दनादन,
मेरे वतन की गलियां यूँ सुनसान क्यों हैं?
न सवाल ही रहा कोई, न जवाब बाकि रहा,
सवालिया बना अब भी देख रहा भगवान क्यों है?
it touches the heart & makes you question yourself. Good one Uma. Keep it up!!!
ReplyDeleteAbe ye Sher Shayari ko chhodo development karo............................:)
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