Sunday, August 14, 2011

लगा दो आग पानी में, नहीं तो क्या जवानी में


समय झकझोर कर रख दो, पलटकर मोड़ कर रख दो,
बदल लो करवटे अब तुम, ये आलस तोड़ कर रख दो,
लगा दो आग पानी में, नहीं तो क्या जवानी में,
बढ़ो अब तोड़ किनारों को, नहीं तो क्या रवानी में,

बहुत है फैला अँधियारा, लगा दो दांव अब सारा,
दिवाकर ना मिले तो क्या, स्वयं तुम हर लो तम सारा,
यही है वक़्त लड़ने का, बदलने का, ना डरने का,
मिला लो स्वर में स्वर मेरे, लगा सिंहनाद सा नारा,
नहीं तो क्या बताओगे, तुम आने वाली पुश्तों को,
कहाँ तुम खुद को पाओगे ,
ना ही हकीकत में, और ना कहानी में,
लगा दो आग पानी में, नहीं तो क्या जवानी में,
बढ़ो अब तोड़ किनारों को, नहीं तो क्या रवानी में,

समय है रूद्र बनने का , समय ये तांडव करने का,
समय ये लहू उबलने का, समय ये कुछ तो करने का,
जो खामोश बैठोगे, तो कैसे क्रांति गायन हो ?
रूद्र की संतान बनो, हिंद के जवान बनो,
कहीं ये घडी बीत ना जाये, फिर से नादानी में,
लगा दो आग पानी में, नहीं तो क्या जवानी में...

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