रूद्र है, कहीं छुपा, की आसमा भी श्याम है,
समय की परिधि पर लग गया लगाम है,
ढूंढकर, सारी दिशाए,हम कहीं गुमनाम हैं,
कोई अनकही कहानी, कह रहे तमाम हैं,
कोई करवट, कोई आहट, का है इंतजार अब तो,
क्या करें पर, पथ ही सारे, कर रहें विश्राम हैं,
भोर की कोई कहानी, कोई आकर के सुनाएँ,
अपहरण सूरज का कर के, बन रहे अनजान हैं,
भ्रम प्रचारक, भ्रमर कोई, कैसे कैसे स्वांग करता,
लोग भी पर हैं अबोले, जैसे वो निष्प्राण हैं,
भोर की कोई कहानी, कोई आकर के सुनाएँ,
ReplyDeleteअपहरण सूरज का कर के, बन रहे अनजान हैं,
..bahut khoob
Gajab sir ji...
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