Saturday, August 23, 2014

मैं भी कुछ अलग नहीं

सुबह का अख़बार,
चाय का कप
नाश्ते की प्लेट,
सामूहिक बलात्कार,
फिर नृशंस हत्या की खबर,

रोज वाली बस,
फिर वही काम काज,
ब्यस्त सा दिन,
ख़त्म फिर दिन,
ख़त्म फिर रात,

दूसरा दिन,
नया अख़बार,
नई ख़बरें,
मृत ह्रदय,

रोज वाली बस,,
और बस में  सफर करते, 
कई नर मुंड,
एक जोड़ी हाथ-पैरो के साथ,
अंधी आँखों के साथ,
गूंगे, जुबान के साथ,
मांस के  टुकड़ों, से जुड़े,

चले जा रहे हैं,
मृत ह्रदय लेकर,
दिन शुरू करके, 
फिर  ख़त्म करने,
मैं भी कुछ अलग नहीं। … 












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