दुआएं कैसे दूँ मैं तुम्हें सारे ज़माने की,
पता है? मेरी दुआओं का असर नहीं होता,
फिर भी कहता की पाओ हर ख़ुशी को तुम,
अगर मैं आसमां में बैठा कोई खुदा होता,
तुमने पूछा था कभी, तन्हाई में क्यों रहते हो,
बता देता तुम्हें सबकुछ अगर मैं दास्ताँ होता,
हर मंजिल पे तेरा नाम हो, हर चाहत हो पूरी,
बिछा देता मैं खुद पे फूल अगर मैं रास्ता होता
(मूल रचना २०-जुलाई-२००४)
पता है? मेरी दुआओं का असर नहीं होता,
फिर भी कहता की पाओ हर ख़ुशी को तुम,
अगर मैं आसमां में बैठा कोई खुदा होता,
तुमने पूछा था कभी, तन्हाई में क्यों रहते हो,
बता देता तुम्हें सबकुछ अगर मैं दास्ताँ होता,
हर मंजिल पे तेरा नाम हो, हर चाहत हो पूरी,
बिछा देता मैं खुद पे फूल अगर मैं रास्ता होता
(मूल रचना २०-जुलाई-२००४)
Behtarin...
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