माँ, अब इंतजार मत कर उसके लौट आने का,
वो बहुत दूर जा चुका,
तेरे गोद में वो अब नहीं आएगा,
ना ही तेरे आँचल में वो छुप जायेगा.
ये आँगन तरसता रहेगा..उम्र भर..
मगर उसके आहट को ना पायेगा.
माँ, अब इंतजार मत कर उसके लौट आने का,
वो बहुत दूर जा चुका,
वो अब नहीं बोलेगा,
माँ, आज सर में दर्द है, बालों में ऊँगली फिराना,
आज आलू खाने का मन नहीं कर रहा,
करेले की सब्जी बनाना..
अब तुम उसे डांट नहीं पाओगी,
ज्यादा मिर्च खाने पर..
ना ही दुलार पाओगी..
उसके थककर घर लौट आने पर..
माँ, अब इंतजार मत कर उसके लौट आने का, वो बहुत दूर जा चुका,
चल माँ, अब कुछ खा ले,
दिल को बहला ले,
इन पथराई आखों को थोडा आराम दे..
माँ, याद है होली में,,
वो रंगों के बीच कैसे गुम हो जाता था..
और वो रंगों से भीगे, बताशे खाने को फिर निकल आता था..
कहता था..माँ भूख लगी है..
और मुंह में गुझिया दबाये फिर चला जाता था..
माँ अब बताशे कौन खायेगा..
और वो गुझीये खाने थोड़ी ना लौट कर आएगा..
माँ, और वो दिवाली में तुम्हारा रंगोली बनाना,
हम दोनों, अपनी पसंद के रंग खानों में भर देते थे..
उनके बीच दीप रख देते थे..
माँ, हम इस बार दीप नहीं जलाएंगे..
वो ही नहीं है तो रंगोली भी क्यों बनायेंगे..
आँगन को रहने देंगे सूना सूना,
हो सकता है वो आकर पूछे,
कि रंगोली क्यों नहीं बनाई?
दीपों कि माला आँगन में क्यों नहीं सजाई?
माँ, मगर वो परियों के देश से कैसे निकल पायेगा?
सिर्फ तेरी रंगोली देखने..इतनी दूर से वो नहीं आएगा..
माँ, अब इंतजार मत कर उसके लौट आने का,
वो बहुत दूर जा चुका,
कितना बड़ा दुख माँ के लिए..ओह!
ReplyDeleteओह क्या कहूं कि नम है आखें पढ कर बस इतना ही ..शुक्रिया
ReplyDeleteFull of Sentiments. "बेटे के विरह का इतना सजीव चित्रण. आँखें भर आई. " Wonderful Uma. 5* from me
ReplyDeletekya baat hai jaan dil ko chooooo liya
ReplyDeleteJo beet gaye so baat gaye ...
ReplyDeletebolo toote taaro par kab amber shoor machata hai ???
bahut sunder hai bhav.
ReplyDeleteEk din wo jaroor ayenge our our apni ma apne ..... ke god me phir khelenge bus andasj badal jayenge par ek din phir wo jaroor ayenge
ReplyDelete