(1)
चाँद को उछाला ही था इस कदर क्यों,
कमबख्त फलक पर दूर जा अटका पड़ा है ,
लोग लड़ते हैं जमीं पर, रौशनी के लिए,
(2)
हमारी याद जब आये तो हमको आजमा मिला,
तुम्हारी बेख्याली में ही एक ख्याल होंगे हम
(3)
हसरतों का क्या करें, ऐ जिंदगी तू ही बता,
बेटी की मासूम आँखें, नम ना हो कभी, और क्या
चाँद को उछाला ही था इस कदर क्यों,
कमबख्त फलक पर दूर जा अटका पड़ा है ,
लोग लड़ते हैं जमीं पर, रौशनी के लिए,
(2)
हमारी याद जब आये तो हमको आजमा मिला,
तुम्हारी बेख्याली में ही एक ख्याल होंगे हम
(3)
हसरतों का क्या करें, ऐ जिंदगी तू ही बता,
बेटी की मासूम आँखें, नम ना हो कभी, और क्या