Wednesday, July 30, 2014

बिखरे मोती-१

                      (1)
चाँद को उछाला ही था इस कदर क्यों,
कमबख्त फलक पर दूर जा अटका पड़ा है ,

लोग लड़ते हैं जमीं पर, रौशनी के लिए,


                      (2)
हमारी याद जब आये तो हमको आजमा मिला,
तुम्हारी बेख्याली में ही एक ख्याल होंगे हम

                     (3)
हसरतों का क्या करें, ऐ जिंदगी तू ही बता,
बेटी की मासूम आँखें, नम ना हो कभी, और क्या

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