Tuesday, February 10, 2015

एक ऐसा आइना हूँ मैं

तू ना देख कर मुझे देख ले,एक ऐसा आइना हूँ मैं,
जहाँ शाम से ना शब् मिले,एक ऐसा सिलसिला हूँ मैं


मुझे इस कदर ना तलाश कर तेरी आरजू में बसा हूँ मैं,
मुझे मत नवाज तू सुकून ए शाम, लम्हों का बस कतरा हूँ मैं,

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